
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र 2026 के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए उम्मीद जताई कि जिस तरह देश में मानसून अच्छी बारिश लेकर आता है, उसी तरह यह संसदीय सत्र भी सकारात्मक और परिणामकारी साबित होगा। उन्होंने कहा कि संसद में होने वाली रचनात्मक चर्चाएं देश के विकास और जनकल्याण को नई दिशा देंगी।
प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ सप्ताहों में भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और औद्योगिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने हाल ही में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि युवा स्टार्टअप्स ने अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत की नई पहचान बनाई है। उनके अनुसार, युवाओं की ऊर्जा और नवाचार देश के भविष्य को मजबूत बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की सुधारवादी नीतियों के कारण युवाओं को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने और बड़े लक्ष्य हासिल करने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने राजस्थान में शुरू हुई नई तेल रिफाइनरी, तीसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र और हरित हाइड्रोजन ट्रेन जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन उपलब्धियों का श्रेय देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों और श्रमिकों को दिया, जिनके प्रयासों से भारत लगातार आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और विकास दर का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि देश चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

संसद के आगामी कामकाज को लेकर प्रधानमंत्री ने सभी दलों के सांसदों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर तथ्यों और तर्कों के आधार पर सार्थक चर्चा करें। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहां होने वाली बहसें राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने वाली होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि मानसून सत्र के दौरान ऐसे निर्णय लिए जाएंगे जो देश के विकास, जनकल्याण और भविष्य की प्रगति को नई गति प्रदान करेंगे।




