हर औरत वेश्या नहीं होती लेकिन हर वेश्या एक औरत होती है: सहादत हसन मंटो की कहानी हत्तक का 12 जुलाई को मंचन

सृजन शक्ति वेलफेयर सोसायटी द्वारा सहादत हसन मंटो की कहानी का संगीत नाट्य अकादमी में मंचन
लखनऊ। सहाद्त हसन मंटो की कहानियां लोगो के दिलो में छाप छोड़ देती हैं। अगर आप भी ऐसी ही कहानी मंचन को देखना चाहते हैं तो बुधवार यानी बारह जुलाई को गोमतीनगर के संगीत नाट्य अकादमी में शाम सात बजे जाना ना भूलें।
सोमवार को इस मंच से जुड़ी प्रेस कांफ्रेंस में सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी की महासचिव व इस नाट्यप्रस्तुति की भूमिका में सीमा मोदी उर्फ़ सौगंधी ने बताया गया कि संस्था द्वारा 12 जुलाई को लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी ,सन्त गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह ऑडिटोरियम में उर्दू के सुप्रसिद्ध लेखक सआदत हसन मंटो की कहानी ” हत्तक ” का मंचन करने जा रही है। इस कहानी का नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी के के अग्रवाल द्वारा किया गया है।

उन्होंने बताया कि उनकी संस्था, मंच के माध्यम से अच्छे साहित्य को समाज के समक्ष लाने हेतु प्रयासरत है। इसी कड़ी में पिछले आठ वर्षों में संस्था सौ से अधिक प्रस्तुतियां कर चुकी है।
मंटो के बारे में बोलते हुए के के अग्रवाल ने कहा कि मंटो अपने वक्त की नंगी सच्चाईयों को बेझिझक अपनी कहानियों में उतारते थे। उन्होंने न केवल आम औरतों पर होने वाले ज़ुल्मों के ख़िलाफ़ लिखा बल्कि वेश्याओं की हिमायत में भी खूब कलम चलाई। वो कहते थे, हमें इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि हर औरत वेश्या नहीं होती लेकिन हर वेश्या एक औरत होती है।
कहानी हत्तक एक ऐसी वेश्या की कहानी है जिसमें मोहब्बत करने की अहलियत इस कदर
ज्यादा है कि जो भी मर्द उसके करीब आता है वो उससे मुहब्बत करने लगती है और उसके साथ अपनी बाकी की ज़िन्दगी गुज़ारने का सपना देखने लगती है।
हत्तक का नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन करने के विषय में उन्होंने कहा कि इस कहानी में मानवीय संवेदनाओं को परत दर परत खोल कर दर्शकों के सामने पेश करने की भरपूर संभावनाएं हैं। बदबूदार, घुटन भरी बस्तियों में बसे चकलों में डोलती वेश्याऐं, उनके दलालों और लावारिस बच्चों की जिंदगी , यूं तो चलती फिरती लाशों जैसी होती है ।…. मगर उनमें भी जीने की चाह होती है। उनके भी अपने अरमान होते हैं। वैश्यालयों की ज़िन्दगी में बसे इन किरदारों के दर्द , सोच, भावनायें, संवेदनायें, इन सबको मंच पर लाना एक चुनौती है। इसीलिए उन्होंने इस कहानी को मंचन हेतु चुना है।
इस कहानी का मुख्य किरदार है, एक भावुक महत्वाकांक्षी वेश्या – “सौगंधी” जिसे सीमा मोदी निभाएंगी , साथ में रंगमंच कलाकार अंकुर सक्सेना, नवनीत मिश्रा, अनन्या सिंह, नितिन तिवारी , विनायक होंगे।
प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन गोपाल सिन्हा कर रहे हैं। संगीत संकलन व संचालन सौरभ सक्सेना कर रहे है
मंच परिकल्पना में सादगी के साथ, अभाव, ग़रीबी एवं मजबूरी को दिखाने की कोशिश की है।
इस प्रकार हत्तक की प्रस्तुति न केवल दर्शकों का मनोरंजन करेगी अपितु मंटो की सोच और सशक्त लेखनी से परिचित भी करायेगी।




